गुरुवार, 12 नवंबर 2009

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छह करोड़ भारतीय बच्चे कुपोषित

भारतीय बच्चे
कुपोषण के मामले में भारत अपने पड़ोसी देश पाकिस्तान और बांग्लादेश से आगे है
यूनिसेफ़ की ताज़ा रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनिया के अधिकतर कुपोषित बच्चे दक्षिण एशियाई देशों में हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक दक्षिण एशिया में पाँच वर्ष से कम उम्र वाले इन कुपोषित बच्चों की तादाद आठ करोड़, 30 लाख के क़रीब है.
भारत के लिए चिंताजनक यह है कि ऐसे कुपोषित बच्चों का प्रतिशत भारत में पाकिस्तान और बांग्लादेश से भी ज़्यादा है. केवल भारत में इन बच्चों की तादाद 6.1 करोड़ के आसपास है.
आंकड़ों के मुताबिक भारत में पाँच वर्ष से कम आयु वाले बच्चों की कुल तादाद में कुपोषित बच्चों की तादाद 48 प्रतिशत है. पाकिस्तान में यह 42 प्रतिशत और बांग्लादेश में यह 43 प्रतिशत हैं.
भारत से ज़्यादा कुपोषित बच्चों की प्रतिशत आबादी वाले देश हैं अफ़ग़ानिस्तान और नेपाल. अफ़ग़ानिस्तान में पाँच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में कुपोषितों की संख्या 59 प्रतिशत है और नेपाल में यह तादाद 49 प्रतिशत है.
पर संख्या के हिसाब से यह आकड़ा में भारत में सबसे ज़्यादा है.
विकास का दूसरा पहलू

कुपोषित बच्चों का प्रतिशत

अफ़ग़ानिस्तान- 59 प्रतिशत (29 लाख)
नेपाल- 49 प्रतिशत (17.5 लाख)
भारत- 48 प्रतिशत (6.1 करोड़)
बांग्लादेश- 43 प्रतिशत (72 लाख)
पाकिस्तान- 42 प्रतिशत (लगभग एक करोड़)
(बताए गए आंकड़े पाँच वर्ष से कम उम्र वाले बच्चों की कुल तादाद में कुपोषितों का प्रतिशत हैं.)

रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनिया के कुल कुपोषित बच्चों की तादाद का अधिकांश हिस्सा 24 देशों में पाया गया है. इनमें पाँच देश ऐसे हैं जहाँ कुपोषित बच्चों की तादाद 40 प्रतिशत से अधिक है.
यूनिसेफ़ में दक्षिण एशिया मामलों के क्षेत्रीय निदेशक डेनियल टोले ने इस रिपोर्ट में प्रकाशित तथ्यों को चिंताजनक बताते हुए कहा, "दक्षिण एशिया के कई देशों में आर्थिक प्रगति की सेहत तो ठीक है पर चिंताजनक यह है कि साथ-साथ यहाँ कुपोषित बच्चों की तादाद लगातार अस्वीकार्य स्तर तक बढ़ी हुई है."
दक्षिण एशिया के लिए यह रिपोर्ट किसी ख़तरे की घंटी से कम नहीं है क्योंकि सबसे ज़्यादा कुपोषित बच्चों वाले पाँचों देश दक्षिण एशिया के हैं.
इन देशों में 8.3 करोड़ बच्चे कुपोषित हैं जबकि दुनिया के बाकी सारे देशों में इन बच्चों की कुल तादाद 7.2 करोड़ है.
इन 8.3 करोड़ बच्चों में से 6.1 करोड़ तो अकेले भारत में ही हैं.

रैंकिंग में तीसरे नंबर पर भारत

भारतीय टीम
भारतीय टीम सिर्फ़ दो वनडे ही जीत पाई

ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ एक दिवसीय सिरीज़ से पहले भारत को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) की वनडे रैंकिंग में नंबर वन स्थान हासिल करने का बड़ा दावेदार माना जा रहा था.
लेकिन सिरीज़ के ख़त्म होने के बाद स्थिति ये है कि भारत न तो नंबर वन के स्थान पर पहुँचा और न ही दूसरे नंबर की अपनी सीट बचा पाया.
ऑस्ट्रेलिया के हाथों 4-2 से सिरीज़ गँवाने के बाद भारतीय टीम आईसीसी की रैंकिंग में तीसरे पायदान पर चली गई है.
ऑस्ट्रेलिया की टीम पहले नंबर पर है तो दूसरा स्थान दक्षिण अफ़्रीका को मिल गया है. ऑस्ट्रेलिया ने सात मैचों की सिरीज़ में भारत को 4-2 से मात दी.

रैंकिंग

ऑस्ट्रेलियाई टीम
ऑस्ट्रेलिया ने शानदार प्रदर्शन किया

सातवाँ और आख़िरी वनडे मैच बारिश के कारण रद्द करना पड़ा. पिछले 10 हफ़्तों में ऑस्ट्रेलिया की टीम ने वनडे मैचों में शानदार प्रदर्शन किया है.
इंग्लैंड को वनडे सिरीज़ में 6-1 से पीटने के बाद ऑस्ट्रेलिया ने चैम्पियंस ट्रॉफ़ी पर भी क़ब्ज़ा किया. उसके बाद भारत को भी वनडे सिरीज़ में धूल चटाई.
इस साल 20 सितंबर को जारी रैंकिंग में ऑस्ट्रेलिया की टीम भारत और दक्षिण अफ़्रीका के बाद तीसरे नंबर पर थी. लेकिन अब स्थिति अलग है.
ऑस्ट्रेलिया की टीम दक्षिण अफ़्रीका के आठ रेटिंग प्वाइंट आगे हैं.


    चीन चला रहा है 'ग़ैर क़ानूनी जेल'

    चीन
    चीन के क़ानूनी हिरासत केंद्रों पर भी सवाल हैं

    मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच का कहना है कि चीन कई ग़ैर क़ानूनी हिरासत केंद्र चला रहा है, जिनमें उसके नागरिकों को महीनों तक बंद रखा जाता है.
    संगठन का कहना है कि 'ब्लैक जेल' के रूप में जाने जाने वाले ये केंद्र ज़्यादातर सरकारी होटलों, नर्सिंग होम और मनोवैज्ञानिक अस्पतालों में चलाए जाते हैं.
    इन हिरासत केंद्रों में रखे जाने वाले लोगों में साधारण लोग भी शामिल हैं, जो अन्याय की शिकायत करने बीजिंग आते हैं.
    चीन दावा करता है कि उसके यहाँ क़ानून का शासन है, लेकिन कई अन्य सूत्र ये बताते हैं कि वहाँ 'ब्लैक जेल' हैं.

    रिपोर्ट

    ह्यूमन राइट्स वॉच ने 'ऐन एलेवे इन हेल' नामक इस रिपोर्ट में कहा है कि आम लोगों को अक्सर सड़कों पर से उठा लिया जाता है और फिर उन्हें ग़ैर क़ानूनी हिरासत केंद्रों में ले जाया जाता है.

    बीजिंग में 'ब्लैक जेल' का होना ही चीन सरकार की उस बयान का मज़ाक उड़ाता है, जिसमें चीन सरकार मानवाधिकार की स्थिति सुधारने और क़ानून का शासन स्थापित करने की बात करती है
    सोफ़ी रिचर्ड्सन, ह्यूमन राइट्स वॉच

    कभी-कभी उनका सारा सामान छीन लिया जाता है, उन्हें मारा-पीटा जाता है और उन्हें ये भी नहीं बताया जाता है कि उन्हें क्यों हिरासत में लिया गया है.
    ह्यूमन राइट्स वॉच का कहना है कि उसने इस साल के शुरू में हिरासत में रखे गए 38 लोगों से बातचीत के आधार पर इस रिपोर्ट के लिए सूचना जुटाई है.
    हिरासत में रखे गए एक व्यक्ति ने संगठन को बताया, "मैंने पूछा था कि मुझे क्यों हिरासत में लिया जा रहा है. तभी गार्ड आए और मुझे मारा-पीटा और कहा वे मुझे जान से मारना चाहते हैं. मैं सहायता के लिए ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाने लगा. तो वे रूक गए. लेकिन उसके बाद से मैंने कोई ख़तरा नहीं मोल लिया."
    ग़ैर क़ानूनी रूप से हिरासत में लिए गए कई लोग ऐसे हैं, जिन्होंने याचिकाएँ दाख़िल की हैं और सरकारी विभाग में अपनी शिकायत दर्ज करने बीजिंग आए.
    चीन सरकार का विभाग (स्टेट ब्यूरो फ़ॉर लेटर्स एंड कॉल्स) देश भर के आम लोगों की सहायता के लिए है. जिनकी कोई न कोई चिंताएँ हैं.

    आरोप

    लेकिन कुछ याचिकाकर्ताओं को सादे पोशाक वाले उन सुरक्षा अधिकारियों ने हिरासत में ले लिया, जब वे बीजिंग पहुँचे.

    चीन
    पीड़ित हिरासत केंद्र में प्रताड़ना का आरोप लगाते हैं

    ह्यूमन राइट्स वॉच की एशियाई क्षेत्र की निदेशक सोफी रिचर्ड्सन ने कहा, "बीजिंग में 'ब्लैक जेल' का होना ही चीन सरकार की उस बयान का मज़ाक उड़ाता है, जिसमें चीन सरकार मानवाधिकार की स्थिति सुधारने और क़ानून का शासन स्थापित करने की बात करती है."
    चीन नियमित रूप से इन दावों को ख़ारिज करता रहा है. लेकिन और तो और सरकारी मीडिया में भी 'ब्लैक जेल' के अस्तित्त्व की बात करता रहा है.
    पिछले सप्ताह चाइना डेली ने 'ब्लैक जेल' के एक गार्ड पर चलाए जा रहे मुक़दमे की ख़बर दी थी. इस ब्लैक गार्ड पर हिरासत में ली गई एक 20 वर्षीय महिला के साथ बलात्कार का आरोप था.

    अमरीकी राजदूत ने कहा, मत भेजो और सैनिक

    अफ़ग़ानिस्तान में सैनिक (फाइल)
    अफ़ग़ानिस्तान में अमरीका की भविष्य की रणनीति पर विचार विमर्श करने के लिए अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अपने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के साथ बैठक की है.
    बुधवार को क़रीब ढाई घंटे तक चली इस बैठक में इस बात पर विचार किया गया कि अमरीका अफ़ग़ानिस्तान में जारी संघर्ष से निपटने के लिए आगे क्या क़दम उठाए.
    इस रणनीति का एक अहम पहलू यह है कि क्या अमरीका अफ़ग़ानिस्तान की ज़मीन पर जारी चरमपंथ विरोधी अभियान को मज़बूत और प्रभावी बनाने के लिए वहाँ हज़ारों की तादाद में अतिरिक्त अमरीकी सैनिक भेजने के विकल्प पर विचार करे.
    उधर अफ़ग़ानिस्तान में अमरीकी राजदूत ने व्हाइट हाउस को लिखे एक पत्र में इस बात पर विरोध जताया है कि अफ़ग़ानिस्तान में और अमरीकी सैनिक भेजे जाएं.
    राजदूत कार्ल एकेनबेरी अफ़ग़ानिस्तान में अमरीकी सेना कमांडर भी रह चुके हैं. उन्होंने अपने पत्र में करज़ई सरकार की क्षमताओं और भ्रष्टाचार से निपटने के प्रयासों के प्रति अपनी शंकाएं व्यक्त की हैं.
    इस पत्र का लीक होना और इन बातों का उजागर होना ऐसे समय में हो रहा है जब अमरीकी राष्ट्रपति अफ़ग़ानिस्तान में संघर्ष की रणनीति पर विचार-विमर्श कर रहे हैं.
    अमरीकी राष्ट्रपति ओबामा इस मुद्दे पर अभी अंतिम राय नहीं बना सके हैं और इस बारे में अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया जा सका है.
    बैठक में इस बात पर भी विचार किया गया कि अफ़ग़ानिस्तान में एक लंबा और कठिन अभियान चला रहे अमरीका के सामने क्या विकल्प मौजूद हैं.

    करज़ई पर दबाव

    अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा
    बीबीसी संवाददाता को मिली जानकारी के मुताबिक़ अमरीकी राष्ट्रपति ने कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान के मुद्दे पर सारी ज़िम्मेदारी केवल अमरीका की नहीं है बल्कि वहाँ की सरकार को भी प्रभावी ढंग से काम करने की ज़रूरत है.
    उन्होंने कहा कि काबुल को चाहिए कि और अधिक प्रतिबद्धता के साथ प्रशासनिक कामकाज हो और भ्रष्टाचार से निपटने के लिए ठोस क़दम उठाए जाएं.
    बराक ओबामा की इन बातों का सीधा मतलब यह है कि अफ़ग़ानिस्तान की करज़ई सरकार पर अब अच्छा प्रदर्शन करने के लिए दबाव और बढ़ता नज़र आ रहा है.
    उनके बयान का एक संकेत यह भी है कि बैठक के दौरान अफ़ग़ानिस्तान में अतिरिक्त सैनिक भेजने के सवाल पर भी बातचीत हुई.
    बताया जा रहा है कि विभिन्न स्तरों पर सैनिकों को शामिल करने और आगे की रणनीति को लेकर कई तथ्य बराक ओबामा के समक्ष पेश किए गए हैं.
    एक अधिकारी ने बताया कि बराक ओबामा अफ़ग़ानिस्तान पर भावी अमरीकी रणनीति को लेकर किसी अंतिम नतीजे पर फ़िलहाल नहीं पहुँचे हैं.
    ओबामा अगले कुछ दिनों में एशिया की यात्रा पर निकलने वाले हैं. ऐसे में उनकी ओर से किसी अहम घोषणा की संभावना कम से कम अगले एक सप्ताह तक नहीं है.

    बुधवार, 11 नवंबर 2009

    economic haedline

    uttar korea and dakshin korea ke beech jhadap

    उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया के बीच जलसीमा पर गोलीबारी हुई है. दक्षिण  कोरिया के अनुसार उत्तर कोरिया का एक पोत दक्षिण कोरिया के जलसीमा में घुस आया जिससे चेतावनी के तौर पर दक्षिण कोरिया के पोत पर गोलियां चलाई और जवाब में उत्तर कोरिया के पोत ने भी गोलियां चलायी और वापस अपनी सीमा में लौट गया जबकि उत्तर कोरिया का कहना है कि वह अपनी जलसीमा में ही था और दक्षिण कोरिया को इसके लिए माफी मांगनी चाहिए.
                                                                                                    यह विवाद उस समय हुआ है जब अमेरिका के राष्ट्रपती दोनों देशों के दौरे पर आने वाले हैं.
    नेपाल के सत्ताधारी गठबंधन का नेतृत्व कर रही कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ नेपाल (यूएमएल) का कहना है की नेपाल के प्रगति करने के लिए भारत का साथ ज़रूरी है.
    नेपाल मे माओवादी आंदोलन कर रहे हैं
    उल्लेखनीय है कि नेपाल में माओवादी और सत्ताधारी गठबंधन के बीच संघर्ष चल रहा है और नेपाल की संसद जातीय पंचायत में कम-काज ठप्प  पड़ा है. 
      कहा जाता है कि नेपाली माओवादियों को चीन का समर्थन और सहयोग प्राप्त है, जिसे चीन भारत के विरुद्ध प्रयोग करता रहा है.

    agle do-teen warshon me naksalwad par niyantran

    भारत के गृह मंत्री श्री पी चिदंबरम ने कहा है की अगले दो - तीन वर्षों में नक्सलवाद प्रभावित क्षेत्रों पर नियंत्रण कर लिया जाएगा.

    pighal jayenge himalay k sare gleshiyar 2035 tak

    संयुक्त राष्ट्र ने कहा है की २०३५ तक भारत के सभी गलेशियर पिघल जायेंगे पर भारत इस रिपोर्ट को मानाने के लिए तैयार नहीं है उसने इस रिपोर्ट को चुनौती देने का फैसला किया है.

    maharashtra aur gujrat me samudri toofan kee ashanka

     मौसम विभाग ने आशंका जतायी है की गुरुवार की सुबह भारी बारिश और ७५ ऐलोमीटर की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है.

    बुधवार, 4 नवंबर 2009

    जर्मनी की चांसलर एंगेला मर्केल ने कहा है कि भारत और चीन को विश्वास में लिए बिना जलवायु परिवर्तन पर समझौता संभव नहीं है. जलवायु परिवर्तन पर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय काफी गंभीर है. इसी विषय को लेकर कोपेहेगें में भी एक बैठक होने वाली है. विश्व स्टार पर तापमान में चिंताजनक वृद्धी हुई है और विश्व के कई तटों के डूबने का खतरा बढ़ने लगा है.

    hamid karjyee ladende bhrashtachar se

    अफगानिस्तान के नवनिर्वाचित राष्ट्रपती हामिद करजई ने कहा की भ्रष्टाचार से लड़ना उनकी प्राथमिकता होगी.

    JALDEE SARKAR BANAYEN :- MAHARASHTR RAJYAPAL

    महाराष्ट्र के राज्यपाल ने कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस से राज्य में जल्दी सर्कार गठित करने को कहा है. महाराष्ट्र में पिछले १३ दिनों से कोई सरकर नहीं है चुनाव जीतने वाली दोनों दलों में अभी तक कोई समझौता नहीं हुआ है.
    मुंबई के पास डोंबिवली में गांधीधाम एक्सप्रेस ट्रेन की कई बोगियाँ पटरी से उतर गईं. दुर्घटना में दस से ज़्यादा लोग घायल हुए हैं. यह लगाकर पिछले कुछ महीनो में भारत में ट्रेन दुर्घटनाओं में काफी बढोतरी हुई है.

    BHARAT NE 200 TAN SONA KHAREEDA

    भारत ने २०० टन सोना खरीदा है उम्मीद है इससे सोने के दामो में गिरावट आयेगी. उल्लेखनीय है की भारत सोने का दुनिया का सबसे बड़ा बाज़ार है. वर्ष २००० के बाद अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने पहली बार किसी देश को सोना  बेचा है. डॉलर के मुकाबले सोना अधिक सुरक्षित निवेश मन जाता है यही कारण है की भारत ने सोना  खरीदा है. अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने ४०३.३ टन में से २०० टन सोना भारत को इसलिए बेचा है कि वह कम ब्याज दर पर गरीब देशों को कर्ज दे सके.

    BHALU NE MAR GIRAE CHARAMPANTHI

    भारत प्रशाषित कश्मी के कुलगाम जिले में एक भालू ने अपनी गुफा में आतंकवादियों को छुपा देख उन पर हमला बोल दिया जिसमे एक मारा गया एक घायल है और बांकी भागने में सफल रहे.

    PRADHANMANTRI JI AISI KYA MAJBOORI THI

    जमियत उलेमा हिंद के सम्मलेन में राष्ट्रीय गीत वन्दे मातरम गाने के खिलाफ प्रस्ताव पारित किये गए जिस BAITHAK में गृह मंत्री पी चिदंबरम ने भी भाग लिया था इसपर भाजपा के मुख्तार  अब्बास नकवी ने सवाल उठाया है. भाजपा का कहना है की कांग्रेस नेताओं के ऐसे रवैये से ही अलगाववादियों तथा चरमपंथियों के हौसले बुलंद होते हैं.

    सोमवार, 2 नवंबर 2009

    aaj ka cover

    JALWAYU PARIWARTAN PAR SAMJHAUTA

    क़ानूनों का समर्थन करेंगे सांसद

    गैस
    चीन और अमरीका के सांसदों ने इस समझौते को अपनी मंजूरी दी है.
    डेनमार्क में जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर बैठक कर रहे सोलह देशों के सांसदों ने तय किया है कि वो अपने देशों में मौसम से जुड़े क़ानूनों का समर्थन करेंगे.
    अगर ये देश ऐसा करते हैं तो 2020 तक ग्रीनहाउस गैसों की आवश्यक कटौती का सत्तर प्रतिशत हिस्सा पूरा हो जाएगा. इस समझौते का उन सोलह देशों के सासंदों ने समर्थन किया है जहां ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन अधिक होता है.
    इस समझौते के बाद दिसंबर में होने वाली संयुक्त राष्ट्र की जलवायु परिवर्तन वार्ताओं के दौरान विश्व भर के नेता इस मुद्दे पर कोई बड़ा फ़ैसला कर सकेंगे.
    इस बैठक में दुनिया को ये दिखाने की कोशिश की गई थी कि ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन करने वाले देशों के सांसद मिल कर कितनी प्रगति कर सकते हैं. इस समझौते के तहत ये सांसद अपने देशों में ऊर्जा के मानकों, जंगलों के संरक्षण और अक्षय ऊर्जा के संसाधनों से जुड़े क़ानूनों का समर्थन करेंगे.
    अगर ये देश ऐसा करते हैं तो 2020 तक ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी का सत्तर प्रतिशत हिस्सा पूरा हो जाएगा जिससे दुनिया का तापमान नहीं बढ़ेगा.
    वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर 2020 तक ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में अपेक्षित कमी नहीं आई तो तापमान दो डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है.
    ये सांसद इस बात पर भी राज़ी हुए हैं कि वो जलवायु परिवर्तन से जुड़े तात्कालिक और दूरगामी लक्ष्यों को प्राप्त करने वाले क़ानूनों का समर्थन करेंगे और सरकारों को बाध्य करेंगे कि वो इस दिशा में की जा रही प्रगति की रिपोर्ट लगातार देते रहें.
    समझौते के ये सिद्धांत अमरीकी सांसद एड मार्के और चीन की नेशनल पीपुल्स कांग्रेस के चेयरमैन वांग गुआंगताओ ने पेश किए थे.
    मार्के का कहना था कि सांसदों के बीच हुआ यह समझौता इस बात का संकेत है कि दिसंबर में होने वाला संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन से जुड़ा सम्मेलन सफल रहेगा.

    NOKIYA NE APPEL PE MUKADMA THOKA

    नोकिया ने एपल पर मुक़दमा ठोका

    आई फ़ोन
    नोकिया का कहना है कि आई फ़ोन के सभी मॉडलों में उसकी तकनीक का इस्तेमाल किया गया है
    दुनिया के सबसे बड़े मोबाइल फ़ोन निर्माता नोकिया ने कहा है कि वह आईफ़ोन में पेटेंट का उल्लंघन करने के लिए अपने अमरीकी प्रतिद्वंद्वी एपल के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज किया है.
    नोकिया का आरोप है कि एपल ने आई फ़ोन में उसकी तकनीक का इस्तेमाल किया और इस तकनीक के लिए नोकिया को कोई भुगतान नहीं किया.
    उसका आरोप है कि 'नोकिया ने जो तकनीक इजाद की है एपल उसका मुफ़्त में मज़ा लेना चाहता है'.
    नोकिया ने एपल पर दस तकनीकी मामलों में पेटेंट के उल्लंघन के आरोप लगाए हैं, जिसमें वायरलेस डेटा, स्पीच कोडिंग, सेक्युरिटी और इंक्रिप्शन शामिल है.
    जैसे ही यह ख़बर बाज़ार में पहुँची कि नोकिया ने एपल पर मुक़दमा कर दिया है, एपल के शेयर की क़ीमतों में गिरावट आई है.
    नोकिया का कहना है कि वर्ष 2007 में आई फ़ोन के आने के बाद से हर मॉ़डल में पेटेंट का उल्लंघन किया गया है.

    तकनीक का उपयोग

    मोबाइल उद्योग का मूलभूत नियम है कि कुछ कंपनियाँ तकनीक के विकास के लिए खर्च करती हैं और इस बौद्धिक संपदा के इस्तेमाल के लिए बाक़ी कंपनियों को भुगतान करना पड़ता है
    इलका रानास्तो, वाइस प्रेसीडेंट, नोकिया
    फ़िनलैंड की कंपनी नोकिया का कहना है कि लगभग 40 कंपनियों के साथ उसका समझौता है. इसमें मोबाइल हैंडसेट बनाने वाली ज़्यादातर कंपनियाँ शामिल हैं. इस समझौते के तहत नोकिया कंपनियों को अपनी तकनीक के इस्तेमाल की अनुमति देती है.
    नोकिया का कहना है कि एपल ने ऐसा कोई समझौता नहीं किया है.
    कंपनी में बौद्धिक संपदा और क़ानूनी मामलों के वाइस प्रेसीडेंट इलका रानास्तो का कहना है, "मोबाइल उद्योग का मूलभूत नियम है कि कुछ कंपनियाँ तकनीक के विकास के लिए खर्च करती हैं और इस बौद्धिक संपदा के इस्तेमाल के लिए बाक़ी कंपनियों को भुगतान करना पड़ता है."
    उनका कहना है, "एपल को भी इस सिद्धांत का पालन करना पड़ेगा."
    नोकिया के अधिकारी का कहना है कि पिछले 20 सालों में नोकिया ने 40 अरब यूरो (यानी लगभग 2700 अरब रुपए) अनुसंधान और विकास में खर्च किए हैं.
    इसी महीने की शुरुआत में नोकिया ने अपने पहले तिमाही के नतीजों में अपने मोबाइल की गिरती बिक्री की वजह से घाटा दिखाया था.
    विश्लेषकों का कहना है कि इस घाटे की एक वजह यह भी रही है कि नोकिया के बहुत से ग्राहक आई फ़ोन या रिम के ब्लैकबेरी की ओर चले गए हैं.
    इस बीच एपल ने 1.67 अरब यूरो (यानी कोई 75 अरब रुपए) का फ़ायदा दिखाया है और इसकी वजह आई फ़ोन की बिक्री में सात प्रतिशत की वृद्धि भी एक वजह रही है .

    UP ME RAIL TRAK SE BHIDI


    गोरखपुर से अयोध्या आ रही पैसेंजर ट्रेन रविवार को दोपहर नवाबगंज और टिकरी हाल्ट स्टेशन के बीच चक रसूलपुर गाँव के पास बिना चौकीदार वाली सड़क क्रासिंग पर एक ट्रक से टकरा गई जिसमे 14 लोगों की मृत्यु हो गई और सौ लोग घायल हैं.
    पूर्वोत्तर रेलवे के डिवीजनल रेलवे मैनेजर अशोक सिंह ने बताया कि मरने वालों में ट्रक के ड्राइवर और क्लीनर के अलावा नौ रेल यात्री हैं.
    जानकारी के अनुसार सीमेंट से लदा ट्रक ट्रेन से इस तरह टकराया कि ट्रेन का एक कोच भी चपेट में आ गया जिससे रेल यात्री हताहत हो गए.
    एक स्थानीय पत्रकार का कहना है इन दिनों अयोध्या में सरयू स्नान के लिए बड़ी तादाद में लोग जा रहे हैं.
    कई लोग ट्रेन की छत पर बैठे थे और वो भी दुर्घटना की चपेट में आ गए.
    अशोक सिंह ने बताया कि रेल मंत्रालय ने मरने वालों के आश्रितों को पांच लाख , गंभीर रूप से घायलों को एक लाख और मामूली घायलों को दस हज़ार रुपये मुआवजा घोषित किया है.
    भारत में ऐसे सैकडों रेलवे क्रासिंग हैं,जहां चौकीदार नही होते और अक्सर इस तरह की दुर्घटनाएं हो जाती हैं.

    BHARAT SURAKSHA PARISHAD KA HAQDAR: BUSH.

    सुरक्षा परिषद सदस्यता का हक़दार'

    अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने कहा है कि भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की सदस्यता मिलनी चाहिए.
    दिल्ली में एक सम्मेलन में बोलते हुए उन्होंने चरमपंथ का मुद्दा भी उठाया और कहा कि भारत-अमरीका दोनों वैचारिक स्तर पर चरमपंथियों के ख़िलाफ़ वैचारिक लड़ाई लड़ रहे हैं.
    उन्होंने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में लड़ाई जीतने के लिए भारत और अमरीका को मिलकर काम करना होगा.
    बुश ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत के प्रवेश का समर्थन किया. उनका कहना था, “भारत ने विश्व पटल पर एक मज़ूबत लोकतंत्र के रूप में जगह बनाई है. भारत में सर्व धर्म लोकतंत्र है, यहाँ शांति और सहनशीलता का माहौल है.”
    मनमोहन मेरे अच्छे मित्र
    मुझे आप लोगों के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह बेहद पसंद हैं. वे बुद्धिमान हैं और एक अच्छे इंसान हैं. उन्हें अपना दोस्त कहते हुए मुझे गर्व महसूस होता है.राष्ट्रपति पद छोड़ने के बाद मेरी ज़िंदगी बदल गई है. लेकिन भारत के प्रति मेरा प्यार नहीं बदला है. विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के प्रति अमरीका का अलग ही संबंध है
    जॉर्ज बुश
    जॉर्ज बुश भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ अपने मधुर संबंधों का ज़िक्र करना भी नहीं भूले. उनका कहना था, “मुझे आप लोगों के प्रधानमंत्री बेहद पसंद हैं. वे बुद्धिमान हैं और एक अच्छे इंसान हैं. उन्हें अपना दोस्त कहते हुए मुझे गर्व महसूस होता है.”
    जॉर्ज बुश वर्ष 2006 में भारत आए थे जब दोनों देशों ने परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर किए थे और अन्य रणनीतिक मसलों पर भी बातचीत हुई थी.
    भारत के प्रति अपना प्यार ज़ाहिर करते हुए बुश ने कहा, “राष्ट्रपति पद छोड़ने के बाद मेरी ज़िंदगी बदल गई है. लेकिन भारत के प्रति मेरा प्यार नहीं बदला है. विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के प्रति अमरीका का अलग ही संबंध है.”
    अमरीका के वर्तमान राष्ट्रपति ओबामा को लेकर उन्होंने अपनी राय कुछ यूँ ज़ाहिर की, “व्हाइट हाउस के लिए ओबामा मेरी पहली पसंद नहीं है लेकिन मेरी शुभकामनाएँ उनके साथ हैं. मैं उनकी आलोचना पर ज़्यादा समय ज़ाया नहीं करूंगा, उनके पहले से ही काफ़ी आलोचक हैं.”

    PKAISTAN KO KADA ZAWAB DENGE : P. CHIDAMBARAM.

    पाकिस्तान को 'कड़ा जवाब' देंगे

    पी चिदंबरम
    चिदंबरम ने पाकिस्तान के ख़िलाफ़ कड़ा रवैय्या अपनाया है.
    भारत के गृह मंत्री पी चिदंबरम ने पाकिस्तान के ख़िलाफ़ कड़ा रवैय्या अपनाते हुए कहा है कि अगर पाकिस्तान की तरफ़ से अगर कोई और आतंकी हमला होता है तो उसका ‘कड़ा जवाब’ दिया जाएगा.
    चिदंबरम ने पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा कि वो भारत के साथ खेल न खेले और मुंबई पर हुआ हमला ‘आखिरी खेल’ होना चाहिए.
    मैं पाकिस्तान को चेतावनी देता हूं कि वो हमारे साथ खेल न खेले. मुंबई आखिरी खेल होना चाहिए. ये सब यहीं ख़त्म होना चाहिए
    चिदंबरम
    तमिलनाडु के मदुरै शहर में शनिवार की देर रात एक जनसभा को संबोधित करते हुए चिदंबरम ने कहा, ‘‘ सीमा पार से आतंकवाद को रोकने के लिए हम हर दिन ताकत बढ़ा रहे हैं. मैं पाकिस्तान को चेतावनी देता हूं कि वो हमारे साथ खेल न खेले. मुंबई आखिरी खेल होना चाहिए. ये सब यहीं ख़त्म होना चाहिए.’’
    तमिल भाषा में लोगों को संबोधित करते हुए उनका कहना था, ‘‘अगर पाकिस्तान से चरमपंथी और आतंकवादी भारत के ख़िलाफ़ हमले करते रहे तो वो न केवल हराए जाएंगे बल्कि इसका कड़ा जवाब दिया जाएगा.’’
    उन्होंने कहा कि पाकिस्तान से घुसपैठिए भेजने की किसी भी कोशिश का भारत कड़ा जवाब देगा. उनका कहना था कि भारत ऐसे प्रयासों को रोकने में पूरी तरह सक्षम है.
    चिदंबरम ने कहा कि वो लगातार पाकिस्तान को चेतावनी देते रहे हैं कि वो भारत के मामलों में दखल न दे लेकिन अगर वो ऐसा करते रहे तो उनके साथ सख्ती से निपटा जाएगा.

    bharat kee badi rel durghatnayen

    भारत में बड़ी रेल दुर्घटनाएँ

    भारत का रेल नेटवर्क दुनिया के सबसे बड़े नेटवर्क में से एक हैं. भारतीय ट्रेनों में हर दिन सवा करोड़ से ज़्यादा लोग सफ़र करते हैं.
    एक अनुमान के अनुसार देश में हर साल औसतन 300 छोटी-बड़ी रेल दुर्घटनाएँ होती हैं.


    कुछ बड़ी रेल दुर्घटनाओं पर एक नज़र

    14 फ़रवरी 2009 को रेल बजट के दिन ही हावड़ा से चेन्नई जा रही कोरोमंडल एक्सप्रेस के 14 डिब्बे पटरी से उतरे. हादसे में 15 की मौत हो गई और 50 घायल.
    अगस्त 2008- सिकंदराबाद से काकिनाडा जा रही गौतमी एक्सप्रेस में देर रात आग लगी.इसके कारण 32 लोग मारे गए और कई घायल हुए.
    16 अप्रैल 2007- तमिलनाडु में हुई एक रेल दुर्घटना में कम से कम 11 लोग मारे गए. दुर्घटना थिरुमातपुर के कांचीपुरम गाँव के पास तब हुई जब एक ट्रेन मिनीबस से जा टकराई.
    21 अप्रैल 2005 को गुजरात में बड़ोदरा के पास साबरमती एक्सप्रेस और एक मालगाड़ी की टक्कर में कम से कम 17 लोगों की मौत हो गई और 78 अन्य घायल हो गए.
    फ़रवरी 2005 में महाराष्ट्र में एक रेलगाड़ी और ट्रैक्टर-ट्रॉली की टक्कर में कम से कम 50 लोगों की मौत हो गई थी और इतने ही घायल हुए थे.
    जून 2003 में महाराष्ट्र में हुई रेल दुर्घटना में 51 लोग मारे गए थे और अनेक घायल हुए.
    2 जुलाई, 2003 आँध्र प्रदेश में हैदराबाद से 120 किलोमीटर दूर वारंगल में गोलकुंडा एक्सप्रेस के दो डिब्बे और इंजन एक ओवरब्रिज से नीचे सड़क पर जा गिरे. इस दुर्घटना में 21 लोगों की मौत हुई.
    22 जून, 2003 गोवा और महाराष्ट्र की सीमा पर रत्नागिरी के पास एक विशेष यात्री गाड़ी के डिब्बे पटरी से उतरे. कम से कम 51 यात्रियों की मौत हुई.
    15 मई, 2003 पंजाब में लुधियाना के नज़दीक फ़्रंटियर मेल में आग लगी. कम से कम 38 लोग मारे गए.
    9 सितंबर,2002 हावड़ा से नई दिल्ली जा रही राजधानी एक्सप्रेस दुर्घटनाग्रस्त हुई. इसमें 120 लोग मारे गए.
    12 मई, 2002 नई दिल्ली से पटना जा रही श्रमजीवी एक्सप्रेस पटरी से उतरी. 12 लोग मारे गए.
    22 जून, 2001 मंगलोर-चेन्नई मेल केरल की कडलुंडी नदी में जा गिरी. 59 लोग मारे गए.
    31 मई, 2001 उत्तर प्रदेश में एक रेलवे क्रॉसिंग पर खड़ी बस से ट्रेन जा टकराई. 31 लोग मारे गए.
    रेल दुर्घटनाएँ
    2 दिसंबर, 2000 कोलकाता से अमृतसर जा रही हावड़ा मेल दिल्ली जा रही एक मालगाड़ी से टकराई. 44न की मौत और 140 घायल.
    3 अगस्त, 1999 दिल्ली जा रही ब्रह्पुत्र मेल अवध-असम एक्सप्रेस से गैसल, पश्चिम बंगाल मे टकराई. 285 की मौत और 312 घायल.
    16 जुलाई, 1999 दिल्ली जा रही ग्रैंड ट्रंक एक्सप्रेस मथुरा के पास एक मालगाड़ी से टकराई. 17 मार गए और 200 घायल.
    26 नवंबर, 1998 फ्रंटियर मेल सियालदाह एक्सप्रेस से खन्ना, पंजाब में टकराई. 108 की मौत, 120 घायल.
    14 सितंबर,1997 अहमदाबाद-हावड़ा एक्सप्रेस बिलासपुर, छत्तीसगढ़ में एक नदी में जा गिरी. 81 की मौत, 100 घायल.
    18 अप्रैल, 1996 एर्नाकुलम एक्सप्रेस दक्षिण केरल में एक बस से टकराई. 35 की मौत, 50 घायल हुए.
    20 अगस्त, 1995 नई दिल्ली जा रही पुरुषोत्तम एक्सप्रेस कालिंदी एक्सप्रेस से फ़िरोजाबाद, उत्तर प्रदेश में जा टकराई. 250 की मौत, 250 घायल.
    21 दिसंबर,1993 कोटा-बीना एक्सप्रेस मालगाड़ी से राजस्थान में टकराई. 71 की मौत और अनेक घायल.
    16 अप्रैल, 1990 पटना के निकट रेल में आग लगी. 70 की मौत.
    23 फरवरी, 1985 राजनांदगाँव में एक यात्री गाड़ी के दो डिब्बों में आग लगी. 50 की मौत और अनेक घायल.
    6 जून,1981 बिहार में तूफान के कारण ट्रेन नदी में जा गिरी. 800 की मौत और 1000 से अधिक घायल.

    karnatak me bhajpa kee mushkilen jari

    कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी सरकार और उनके विरोधियों के बीच अभी भी गतिरोध बरकरार है.
    जहां मुख्यमंत्री के समर्थन नेतृत्व में परिवर्तन नहीं चाहते हैं वहीं विरोधी येदियुरप्पा की बर्खास्तगी पर अड़े हुए हैं.
    रविवार को मुख्यमंत्री बी येदियुरप्पा के समर्थकों ने पार्टी आलाकमान से मुलाक़ात की है लेकिन संकट सुलझने के आसार दिख नहीं रहे हैं.
    मुख्यमंत्री के समर्थक गृह मंत्री वीएस आचार्य और पूर्व सांसद धनंजय कुमार ने राजधानी दिल्ली में पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी से मुलाकात की.इस मुलाकात के दौरान इन दोनों नेताओं ने पार्टी हाई कमान को राज्य में नेतृत्त्व में बदलाव न करने के लिए मनाने की कोशिश की.
    गृह मंत्री आचार्य की अध्यक्षता में , काऩून मंत्री सुरेश कुमार और गणेश कार्निक ने लोकसभा में विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी ,उपनेता सुष्मा स्वाराज और पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह से मुलाकात की इन सब का ढृढ़ रुप से एक ही मत था कि कर्नाटक में नेतृत्त्व का कोई बदलाव नहीं होना चाहिए.
    दूसरी तरफ मुख्यमंत्री के विपक्षी खेमे के सदस्य और रेड्डी भाईयों के क़रीबी माने जाने वाले विधानसभा के अध्यक्ष जगदीश शेट्टर ने भाजपा नेता अरुण जेटली से मुलाकात की.
    जनार्दन रेड्डी और जी करुणाकर रेड्डी का आरोप है कि येदियुरप्पा राज्य में तानाशाह के तौर पर सरकार चला रहे हैं और किसी भी मंत्री की बात नहीं सुनते है.
    पिछले कुछ महीनों से रेड्डी भाई सार्वजनिक तौर पर मुख्यमंत्री पर ऐसे आरोप लगाते रहे है वहीं ताज़ा घटनाक्रम में उन्होंने बाढ़ प्रभावित इलाकों में चल रहे राहत काम को लेकर नाराज़गी ज़ाहिर की थी.
    हाल ही में दोनों भाईयों ने मुख्यमंत्री के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उन्हें हटाने की मांग की थी. साथ ही ये भी दावा किया था उनके पक्ष में भाजपा के 117 विधायकों में से 60 विधायक है.
    रेड्डी भाईयों ने जगदीश शेट्टर को मुख्यमंत्री बनाने की मांग की थी.वैसे ये पूरा मामला राजनीति से कम धंधे से ज्यादा जोड़ कर देखा जा रहा है क्योंकि रेड्डी भाई खनन व्यापार से जुड़े हुए हैं.
    भाजपा मामलों की जानकार और द हिंदू अखबार की वरिष्ठ पत्रकार नीना व्यास कहती हैं,
    ‘‘सब जानते है कि वो खनन के व्यापारी है और बेल्लारी और आंध्र प्रदेश के जो आस पास के इलाके है उनका जो धंधा है उसमें उन्हें खुली छूट मिले.वो वहां के राजा बने रहें लेकिन ऐसा वो नहीं कर पा रहे है क्योंकि उसमें मुख्यमंत्री दखल दे रहे थे.इस पूरे मामले में येदियुरप्पा की कितनी भूमिका रही है वो कहना मुशिकल है पर भाजपा नेताओं का ये जरुर कहना है कि ये दोनों भाई पैसे वाले है ऐसे में मामले को संभालना मुशिकल है.’’
    भीतर घात और नेतृत्व में बगावत झेल रही भाजपा के लिए ये एक और झटका है इससे पहले वसुंधरा राजे को राज्य में विपक्ष की नेता के पद से हटाने का मामला हो या जंसवत सिंह का मामला इन सभी मामलों में पार्टी की ख़ासी किरकिरी हो चुकी है.

    सहवाग और गंभीर का खेलना संदिग्ध

    सहवाग
    वीरेंदर सहवाग कोटला वनडे के दौरान चोट खा गए थे
    ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ दिल्ली वनडे मैच में वीरेंदर सहवाग और गौतम गंभीर के चोट लग जाने होने के बाद उनका मोहाली में खेलना संदिग्ध है. हालांकि इस बारे में अंतिम फ़ैसला सोमवार को मैच से पहले किया जाएगा. 

    बीसीसीआई के सचिव वी श्रीनिवासन ने कहा है कि मोहाली में होने वाले चौथे वनडे मैच में वीरेंदर सहवाग और गंभीर का खेलना संदिग्ध है.
    उनका कहना था,'' दोनों को कोटला में हुए वनडे मैच में चोटें आईं हैं. सहवाग पैर में और गंभीर गले में लगी चोट से परेशान हैं लेकिन इनके खेलने के बारे में मैच से पहले फ़ैसला किया जाएगा.''
    सहवाग पैर में और गंभीर गले में लगी चोट से परेशान हैं लेकिन इनके खेलने के बारे में मैच से पहले फ़ैसला किया जाएगा.
    श्रीनिवासन, सचिव, बीसीसीआई
    उल्लेखनीय है कि कोटला में पीटर सिडल की गेंद सहवाग के पैर में लग गई थी.
    गौतम गंभीर को क्षेत्ररक्षण के दौरान गेंद गले में लग गई थी.
    दोनों खिलाड़ियों के चोट लग जाने के कारण दिनेश कार्तिक को टीम में शामिल किया गया है.
    ग़ौरतलब है कि तीसरे वनडे में भारतीय टीम ने ऑस्ट्रेलिया को छह विकेट से हराकर सात मैचों की श्रृंखला में 2-1 की बढ़त बना ली थी.
    पहला मैच वडोदरा में खेला गया था और ऑस्ट्रेलिया ने ये मैच चार रन से जीता था.
    जबकि नागपुर में खेले गए दूसरे मुक़ाबले में भारतीय टीम ने 99 रनों से जीत हासिल की थी.

    श्रीलंका के जनरल से अमरीका की पूछताछ

    राष्ट्रपति राजपक्षे और सरत फ़ॉन्सेका
    जनरल फ़ॉन्सेका सरकारी और निजी दोनों काम से अमरीका में हैं
    श्रीलंका सरकार के सूत्रों का कहना है कि अमरीकी सरकार श्रीलंका के सेना प्रमुख सरत फ़ॉन्सेका से सेना के कथित युद्धापराधों के बारे में पूछताछ करना चाहती है.
    ये युद्धापराध इस साल के शुरु में देश के पूर्वोत्तर में तमिल विद्रोहियों के साथ चल रही लड़ाई के दौरान किए गए.
    दस दिन पहले अमरीका के विदेश विभाग ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी जिसमें तमिल विद्रोहियों और सेना के बीच हुई लड़ाई के अंतिम चरणों में दोनों पक्षों की ओर से किए गए युद्धापराधों के विश्वसनीय प्रमाण दिए गए थे.
    अब अमरीकी सरकार श्रीलंका सेना प्रमुख से इस बारे में पूछताछ कर सकती है.
    पूछताछ
    श्रीलंका सरकार के एक वरिष्ठ सूत्र ने बीबीसी को बताया कि अमरीका का गृह सुरक्षा विभाग इन आरोपों के संबंध में बुधवार को जनरल सरत फ़ॉन्सेका के साथ पूछताछ करना चाहता है और ये भी चाहता है कि वो श्रीलंका के शक्तिशाली प्रतिरक्षा मंत्री गोटभाया राजपक्षे के ख़िलाफ़ गवाही दें.
    जनरल फ़ॉन्सेका इस समय कुछ सरकारी काम और कुछ निजी काम से अमरीका में हैं.
    सरकारी सूत्र ने बताया कि श्रीलंका सरकार ने इस पूछताछ के आग्रह पर आपत्ति उठाई है. लेकिन कोलंबो स्थित अमरीकी दूतावास ने इस पर किसी प्रकार की टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.
    अमरीका के विदेश विभाग की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया था कि श्रीलंका की सेना ने आम नागरिकों के लिए बनाए गए सुरक्षित क्षेत्रों पर बम्बारी की और साथ ही उन विद्रोहियों को मारा जो आत्मसमर्पण करना चाहते थे.
    इस रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि तमिल विद्रोहियों ने बच्चों की भर्ती की और विस्थापित तमिलों को युद्धक्षेत्र से पलायन नहीं करने दिया.
    श्रीलंका की सरकार ने इन आरोपों का खंडन किया था लेकिन साथ ही ये भी कहा कि वह मामले की जांच के लिए एक समिति का गठन करेगी