
कुपोषण के मामले में भारत अपने पड़ोसी देश पाकिस्तान और बांग्लादेश से आगे है
यूनिसेफ़ की ताज़ा रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनिया के अधिकतर कुपोषित बच्चे दक्षिण एशियाई देशों में हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक दक्षिण एशिया में पाँच वर्ष से कम उम्र वाले इन कुपोषित बच्चों की तादाद आठ करोड़, 30 लाख के क़रीब है.
भारत के लिए चिंताजनक यह है कि ऐसे कुपोषित बच्चों का प्रतिशत भारत में पाकिस्तान और बांग्लादेश से भी ज़्यादा है. केवल भारत में इन बच्चों की तादाद 6.1 करोड़ के आसपास है.
आंकड़ों के मुताबिक भारत में पाँच वर्ष से कम आयु वाले बच्चों की कुल तादाद में कुपोषित बच्चों की तादाद 48 प्रतिशत है. पाकिस्तान में यह 42 प्रतिशत और बांग्लादेश में यह 43 प्रतिशत हैं.
भारत से ज़्यादा कुपोषित बच्चों की प्रतिशत आबादी वाले देश हैं अफ़ग़ानिस्तान और नेपाल. अफ़ग़ानिस्तान में पाँच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में कुपोषितों की संख्या 59 प्रतिशत है और नेपाल में यह तादाद 49 प्रतिशत है.
पर संख्या के हिसाब से यह आकड़ा में भारत में सबसे ज़्यादा है.
विकास का दूसरा पहलू
कुपोषित बच्चों का प्रतिशत
अफ़ग़ानिस्तान- 59 प्रतिशत (29 लाख)
नेपाल- 49 प्रतिशत (17.5 लाख)
भारत- 48 प्रतिशत (6.1 करोड़)
बांग्लादेश- 43 प्रतिशत (72 लाख)
पाकिस्तान- 42 प्रतिशत (लगभग एक करोड़)
(बताए गए आंकड़े पाँच वर्ष से कम उम्र वाले बच्चों की कुल तादाद में कुपोषितों का प्रतिशत हैं.)
रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनिया के कुल कुपोषित बच्चों की तादाद का अधिकांश हिस्सा 24 देशों में पाया गया है. इनमें पाँच देश ऐसे हैं जहाँ कुपोषित बच्चों की तादाद 40 प्रतिशत से अधिक है.
यूनिसेफ़ में दक्षिण एशिया मामलों के क्षेत्रीय निदेशक डेनियल टोले ने इस रिपोर्ट में प्रकाशित तथ्यों को चिंताजनक बताते हुए कहा, "दक्षिण एशिया के कई देशों में आर्थिक प्रगति की सेहत तो ठीक है पर चिंताजनक यह है कि साथ-साथ यहाँ कुपोषित बच्चों की तादाद लगातार अस्वीकार्य स्तर तक बढ़ी हुई है."
दक्षिण एशिया के लिए यह रिपोर्ट किसी ख़तरे की घंटी से कम नहीं है क्योंकि सबसे ज़्यादा कुपोषित बच्चों वाले पाँचों देश दक्षिण एशिया के हैं.
इन देशों में 8.3 करोड़ बच्चे कुपोषित हैं जबकि दुनिया के बाकी सारे देशों में इन बच्चों की कुल तादाद 7.2 करोड़ है.
इन 8.3 करोड़ बच्चों में से 6.1 करोड़ तो अकेले भारत में ही हैं.
















