आज एक बार फिर हमें कीड़ों की तरह मारा गया एक बार फिर हमने एक भारतीय होने का दंश झेला. एक बार फिर हमने स्वार्थी निकम्मे और नकारे लोगों को अपना प्रतिनिधि बनाने की सजा पाई. ये बारूदी लम्हा हमें अपने गलत विकल्प चुनने की एक और सजा दे गया. कबतक हम सिर्फ उन लोगों को ही अभागे समझते रहेंगे जिनके अपने आतंकवादी हमलों में मारे जाते हैं. क्या हमारा दुर्भाग्य नहीं है. मित्रों क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो इस हमले के लिए हमारे पड़ोसी राष्ट्र को जिम्मेदार मानते हैं अगर हाँ तो जरा सोचिये हमला करने वाले संगठन ने इस हमले का क्या कारण बताया वो अफजल गुरु की फंसी की सजा को माफ़ करवाना चाहते थे. अरे याद आया हमारे देश के भीतर भी कुछ लोगों ने यही मांग की थी. हमारी राष्ट्रपति भी शायद करें न करें के बीच में फंसी हुई हैं. आखिर क्यूँ हमारी सरकार कसाब और अफजल गुरु को फंसी देने से हिचकती है हमारी सरकार किससे डरती है. और कितने हमलों को निमंत्रण दिया जाएगा. हमारी सरकार किन्कर्ताव्य्मूध क्यूँ बन जाती है जब राष्ट्रीय सुरक्षा के ऐसे गंभीर प्रश्न सामने आते हैं. हम भारत के लोग ऐसी घटिया सरकार के लिए खुद को जिम्मेदार मानने से कबतक बचते रहेंगे. हाँ हम जिम्मेदार हैं कि हमने ऐसे घटिया लोगों अपना भाग्यविधाता बनाया और जबतक हम ऐसे लोगों को चुनने का आत्मघाती निर्णय लेते रहेंगे हमपर ये घात होता रहेगा. क्यूंकि ये हमला हमारी गैरजवाबदेही से मतदान देने के कारण चुनकर आए लोगों के स्वार्थ का परिणाम है.
1 टिप्पणी:
sach kaha...par janta ko kisi ko to chunana h.hum chup chap ghar me baithkar aur vote na gira kar apni pratikriya karte hai...par ye prtikriya chardiwari me hi simat jati h...agar sarkar chahe to aaisa ho sakta h ki jab koi b candidate yogya na ho to blank voting ki jaye...aur agar sabse jyada blank vote huye to re-election...jisse political parties bahubaliyon ko ticket na dekar saf suthari chavi valo ko ticket dene lage...par hum bloglikhne aur coment se jyada kya kar sakte h...
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